कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को पुष्टि की कि हाल ही में रूसी हमलों में मरने वालों की संख्या 16 तक पहुंच गई. इनमें छह बच्चे शामिल हैं जबकि खार्किव में लक्षित ड्रोन हमले के बाद पांच अन्य मारे गए.




उन्होंने आगे बताया कि इस हमले में 34 लोग ड्रोन अटैक से भी घायल हुए हैं. एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए जेलेंस्की ने लिखा, ‘रूसी मिसाइल हमले के बाद क्रिवी रिह में बचाव अभियान चलाया गया. अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें छह बच्चे शामिल हैं.
खार्किव में लक्षित रूसी ड्रोन हमले के बाद बचाव कार्य पूरे दिन जारी रहा. ड्रोन द्वारा जानबूझकर किया गया हमला. इस हमले में दुखद रूप से पांच लोग मारे गए. 34 घायल हो गए. उन्होंने पीड़ित परिवारों और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं व्यक्त की. खेरसॉन में एक रूसी एफपीवी ड्रोन द्वारा किए गए एक अन्य लक्षित हमले में एक ऊर्जा सुविधा खेरसॉन थर्मल पावर प्लांट को निशाना बनाया गया.
उन्होंने आगे कहा, ‘ये हमले आकस्मिक नहीं हो सकते. रूसियों को अच्छी तरह पता है कि वे किस पर हमला कर रहे हैं. वे जानते हैं कि ये ऊर्जा सुविधाएं हैं, जिन्हें हमलों से बचाया जाना चाहिए, जैसा कि रूस ने स्वयं अमेरिकी से वादा किया था.
रूस का हर वादा मिसाइलों या ड्रोन, बम या तोपखाने के साथ खत्म होता है. कूटनीति उनके लिए कोई मायने नहीं रखती. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम पहले ही हो सकता था, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार इसे खारिज कर दिया है.
जेलेंस्की ने कहा कि रूस पर दबाव देने की आवश्यकता है. ताकि वे युद्ध विराम पर सहमत हों. उन्हें हर झूठ, हर हमले, युद्ध को लम्बा खींचने के परिणाम भुगतने पड़ें. युद्ध विराम पहले ही हो सकता था. पुतिन ने इसे अस्वीकार कर दिया. रूस ने 11 मार्च से युद्ध विराम से इनकार कर दिया. रूस में वे ही लोग हैं जो इस युद्ध को चाहते हैं.
इस बीच 23 से 25 मार्च तक अमेरिका ने सऊदी अरब के रियाद में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों के साथ विशेषज्ञ स्तर की चर्चा की. ये द्विपक्षीय बैठकें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्रमशः रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ उच्च स्तरीय चर्चा के बाद हुई.
वार्ता मुख्य रूप से काला सागर में सुरक्षा, वाणिज्यिक समुद्री गतिविधि की सुरक्षा, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का संरक्षण तथा स्थायी शांति को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयासों पर केंद्रित थी.
