नई दिल्ली। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने आज चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों का एलान कर दिया है। वित्तीय नतीजों के मुताबिक सितंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 12,967.32 करोड़ रुपये रहा।




इंडियन ऑयल ने बताया कि एक साल पहले की समान अविधि में कंपनी को 272.35 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि इस बार तिमाही में बढ़े मुनाफे की वजह इंडियन ऑयल ने रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन में वृद्धि को बताया है।
प्री-टैक्स अर्निंग में बढ़त
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से प्री-टैक्स अर्निंग बढ़कर 17,755.95 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 104.04 करोड़ रुपये थी।
आपको बता दें कि पिछले साल, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां जैसे- आईओसी, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने कीमतें को स्थिर रखा है।
स्थिर कीमतों के कारण हुआ था घाटा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें में बढ़ोतरी हुई लेकिन देश में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा जिसके कारण तीनों कंपनियों को 2022-23 वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में घाटा हुआ था।
आईओसी को अप्रैल-सितंबर 2022 में 2,264.88 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। हालांकि, इस साल, कंपनी ने अप्रैल-सितंबर 2023 में 26,717.76 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कमाई दर्ज की, जो कंपनी द्वारा 2021-22 में दर्ज किए गए 24,184 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड शुद्ध लाभ से अधिक है।
राजस्व में आई कमी
वित्तीय नतीजे जारी करते हुए इंडियन ऑयल ने बताया कि तेल की कम कीमतों के कारण जुलाई-सितंबर में इसका राजस्व पिछले साल के 2.28 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 2.02 लाख करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी ने बताया कि अप्रैल-सितंबर 2023 में कच्चे तेल के प्रत्येक बैरल को फ्यूल में बदलने पर कंपनी ने 13.12 अमेरिकी डॉलर कमाए, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में सकल रिफाइनिंग मार्जिन 25.49 अमेरिकी डॉलर था।
सितंबर तिमाही में कितनी रही बिक्री?
नतीजों के मुताबिक आईओसी ने सितंबर तिमाही में 21.941 मिलियन टन पेट्रोलियम प्रोडक्ट बेचे हैं। वहीं इंडियन ऑयल की रिफाइनरी में सितंबर तिमाही में 17.772 मिलियन टन क्रूड ऑयल से फ्यूल निकाला गया है।
