नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा के जरिए राजधानी के सरकारी स्कूलों में इसी वर्ष प्रधानाचार्य बने उम्मीदवारों के दस्तावेज में फर्जीवाड़ा किए जाने के आरोप लगे थे। इस मामले में जांच के बाद शालीमार गांव स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल विद्यालय के प्रधानाचार्य सूर्य प्रकाश मिश्रा का अनुभव प्रमाणपत्र भौतिक सत्यापन में फर्जी पाया गया।




अभी तक सिर्फ एक मामले में प्रधानाचार्य की ओर से लगाए गए अनुभव प्रमाणपत्र पर कथित तौर पर उस हस्ताक्षर को करने वाले ने पहचानने से इंकार कर दिया। प्रधानाचार्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर सेवा से तत्काल हटाने के लिए फाइल नियुक्ति प्राधिकारी को भेजी गई है। नियुक्ति में धांधली पाए जाने पर अन्य प्रधानाचार्यों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि उम्मीदवारों को नियुक्ति देने से पहले यूपीएससी ने शिक्षा निदेशालय से उनके आवश्यक दस्तावेज सत्यापित करने का अनुरोध किया था। निदेशालय ने 10 से 17 अप्रैल, 2023 के बीच सत्यापन पूरा कर प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का अनंतिम प्रस्ताव जारी किया था। इसके बाद भी कमियां मिलने पर दोबारा सत्यापत किया गया था। दोबारा सत्यापन के आदेश पर आरोपित प्रधानाचार्य सूर्य प्रकाश मिश्रा ने कहा था कि सत्यापन प्रक्रिया के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके दस्तावेजों के साथ कुछ लोगों ने छेड़छाड़ की है। निदेशालय की जांच पूरी होने के बाद जल्द ही उन लोगों के नाम भी सामने आ जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक मिश्रा ने टांडा स्थित डीएवी स्कूल का फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाया था, जबकि डीएवी की प्रबंधन समिति ने स्वीकार किया कि उन्हें स्कूल से निकाला गया था।
ये है पूरा मामला
दैनिक जागरण ने 27 अगस्त के अंक में 334 प्रधानाचार्यों की नियुक्ति में हुई धांधली व फर्जीवाड़े की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि शिक्षा निदेशालय ने दस्तावेज के सत्यापन में किस तरह खानापूर्ति कर उम्मीदवारों को अलग-अलग स्कूल आवंटित किए थे।
नियुक्ति के लिए प्रधानाचार्यों ने अपने अनुभव, शैक्षिक और ईडब्ल्यूएस के फर्जी प्रमाणपत्र लगाए। इसके बाद निदेशालय ने दस्तावेज सत्यापन के लिए दो कमेटियां गठित की थीं।
