हमीरपुर ब्यूरो :–
मौदहा नगर के इमाम मौलाना करामत उल्ला ने रमज़ान के मुबारक महिने का जिक्र करते हुए बताया की दुनियाँ में जितनी भी मखलूक है उन तमाम मख़लूक में इंसान को सबसे सम्मानीय मख़लूक अल्लाह ने बनाया है भलाई और बुराई की सलाहियत भी इंसान के अंदर अल्लाह ने रख दी है। इसी का नतीजा है कि किसी भी इन्सान से अच्छाई या बुराई वज़ूद में आ सकती है। और जो शख्स अच्छाइयों की तरफ बढ़ता जाता है तो वो अपने खालिख और मखलूक के दरमियान सबसे सम्माननीय हो जाता है और रोज़े का मकसद भी यही है के इंसान गुनाहों से परहेज करने वाला बन जाये। इसीलिए रमज़ानुल मुबारक साल भर के इस्लामी महीनों में सबसे ज्यादा अजमतों, फजीलतों और बरकतों वाला महीना है। इस महीने में हर एक अम्ल का बदला कई गुना बढ़ा दिया जाता है। इस माह की एक रात जिसे सब-ए-कद्र कहा जाता है वो 1000 महीनों से अफ़ज़ल करार दी गई है। यह सब्र का महीना है और सब्र का बदला जन्नत है खैर ख्वाही का महीना है। रमजानुल मुबारक का महीना 3 अश्रो में तकसीम किया गया है। पहला अशरा रहमत का आश्रा दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नाम से खलासी का। इस मुबारक महीने का एक अशरा मुकम्मल हो चुका। यह दूसरा असरा चल रहा है तक़रीबन 1/2 रमज़ान गुजर चुका इसका। तीसरा अशरा बहुत कीमती अशरा है। इसकी रातें बहुत (अफ़ज़ल) सम्माननीय हैं। इसकी आखिरी 10 रातों में हमें ऐतिकाफ करना चाहिए। हुजूर पाक का इरशाद है की जिसने आखिरी 10 दिन ऐतिकाफ किया उसको दो हज और दो उम्रे का सवाब मिलेगा। साल भर के महीनों में रमजान मुबारक का महीना ऐसा है जिसका जिक्र कुरान में बार बार आता है। और इसी महीने में क़ुरआन पाक मुकम्मल (उतरा) नाजिल हुआ। जो लोगों के लिए हक और बातिल में तमीज करने का जरिया है। मतलब कुरान और रमजान दोनों का आपस में गहरा ताल्लुक है। क़ुरआन रमजान में आया तो रमजान का चर्चा कुरान में आया है। रमजान मुबारक एक ऐसा महीना है कि इसमें इंसान अगर कोशिश करे तो एक रमज़ान सारे गुनाह बख्शाने के लिए काफी है। रमज़ान का जो कुछ भी हिस्सा बचा है हमें उसकी कद्र करनी चाहिए और अपने गुनाहों के बख्शीश की फिक्र करनी चाहिए।





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