चित्रकूट। लोकमंगलकारी ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के 526 वें जन्मोत्सव पर श्रीकामदगिरि पीठम कामदगिरि प्रदक्षिणा प्रमुख द्वार ट्रस्ट श्री कामतानाथ मंदिर में भव्य शोभा यात्रा व्याख्यान माला एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न जनपदों से आए हुए संत महात्माओं विद्वत महानुभाव समेत चित्रकूट धाम के साधु संतों गणमान्य नागरिकों नगर एवं ग्रामीण वासियों ने सहभागिता की।
श्री कामदगिरि पीठम के अधिकारी संत मदनगोपाल दास जी महाराज के द्वारा तुलसीदास जी के विग्रह का पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात परिक्रमा पथ में दिव्य झांकियों से सुशोभित संकीर्तनमय शोभायात्रा निकाली गई
श्रीकामदगिरि पीठम के सत्संग भवन में गोस्वामी तुलसीदास जी पर संत विभूतियों एवं विद्वानों के व्याख्यान हुए एवं भावांजलि अर्पित की गई
अपने उद्बोधन में ब्रह्मचारी सनकादिक महारा




ज ने कहा कि वर्तमान समय में विधर्मी जिस तरह से प्रभु श्रीराम एवं श्रीरामचरितमानस जैसे पावन ग्रंथ पर अमर्यादित टिप्पणी करते दिखाई पड़ते हैं, सब देख-सुनकर लगता है कि अब संत समाज को “लंका कांड” आरंभ करना पड़ेगा तभी जाकर हम अपने कालखंड में राम का राज्याभिषेक कर पाएंगे
वाराणसी से आए मानस मर्मज्ञ डॉक्टर नवल किशोर ने कहा कि सहिष्णुता से काम नहीं चलेगा श्रीराम और श्रीरामचरितमानस पर विधर्मियों के कुबोल अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे
सुपरिचित रामकथा वाचिका नीलम गायत्री ने गोस्वामी तुलसीदास जी की महिमा पर मनमोहक छंद सुनाते हुए कहा कि द्वापर में एक ही वेदव्यास हुए थे किंतु कलयुग में श्रीरामचरितमानस की रचना करके गोस्वामी तुलसीदास जी ने कोटि-कोटि व्यासों को प्रकट कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि मुगलिया अत्याचार से मलिन मन में प्राण फूंक कर गोस्वामी जी ने सनातन धर्म को संरक्षित किया अब जिम्मेदारी समाज की है
श्रीकामदगिरि पीठम के अधिकारी संत मदनगोपाल दास ने कहा कि सिंहस्त भूषण श्रीमहंत साकेतवासी प्रेमपुजारी दास जी महाराज द्वारा श्रीकामदगिरि पीठम में 65 वर्ष पूर्व गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म महोत्सव प्रारंभ किया गया था जो प्रत्येक वर्ष अनवरत चलता आ रहा है बड़ी संख्या में पूज्य संतों विशिष्टजनों सहित सामान्यजनों की भागीदारी रहती है। उन्होंने आगे कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी कृत वांग्मय विग्रह श्रीरामचरितमानस जीवन की संहिता है। मानव में मानवता लाने के लिए श्रीरामचरितमानस का परिवारों में पारायण होते रहना चाहिए। लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति से ग्रसित पीढ़ी को श्रीरामचरितमानस से जोड़ना जरूरी है नहीं तो आने वाली पीढ़ी संस्कारित नहीं हो पाएगी और राष्ट्र में अपसंस्कृति बढ़ती जाएगी
उल्लेखनीय है कि संत मदनगोपाल दास की अगुवाई में श्रीरामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराए जाने हेतु देशव्यापी हस्ताक्षर महा अभियान भी चलाया जा रहा है
व्याख्यान कार्यक्रम में दधिमुख श्रीहनुमान मंदिर के मास्टर जी तिवारी जी महाराज, समाज चिंतक गोपाल भाई एवं शशि भूषण महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
महोत्सव में ब्रह्मचारी सनकादिक महंत सीताशरण माधव दास सच्चिदानंद ओंकार दास नरसिंह नागा दास रामजी दास नंदकिशोर दास मोहनदास बालकदास समेत विभिन्न अखाड़ों मठ मंदिरों के महामंडलेश्वर महंत साधू महात्मा समाजसेवी राजनेता नगर तथा ग्रामीणवासी उपस्थित रहे
रिपोर्ट सूरज श्रीवास्तव चित्रकूट
