बिजनौर। राष्ट्रीय लोकदल रुहेलखंड क्षेत्र के उपाध्यक्ष शमशाद अंसारी ने अपने साथियों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। उनका कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए वक्फ संशोधन विधेयक का रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयन्त चौधरी द्वारा समर्थन दिए जाने से मुस्लिम समाज आहत है और स्वयं को ठगा महसूस कर रहा है।




शमशाद की पत्नी बिजनौर नगर पालिका की चेयरमैन रह चुकी हैं। इससे पहले शुक्रवार को एक वीडिया जारी कर शाहजेब रिजवी ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी। शाहजेब रिजवी ने स्वयं को रालोद प्रदेश महासचिव बताया है, जबकि रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा है कि वह कमेटी में नहीं हैं।
सपा के रहे सक्रिय नेता
जिलाध्यक्ष मतलूब गौड़ ने कहा कि वह पिछले एक साल से पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं थे। पूर्व में वह युवा के प्रदेश महासचिव थे। शमशाद अंसारी ने शनिवार को प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि वह सपा के सक्रिय नेता रहे और बाद में रालोद का दामन थामा।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों संभल में हुई घटना और सड़क पर नमाज पढ़ने से रोके जाने का मुद्दा रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयन्त चौधरी के समक्ष उठाया, किंतु वह इन पर चुप्पी साध गए। अब वक्फ संशोधन अधिनियम को रालोद द्वारा समर्थन दिए जाने से वह और मुस्लिम समाज के लोग बेहद आहत हैं।
‘जयन्त पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचारधारा से भटक गए’
यही कारण है कि वह और उनके करीब 200 साथियों ने रालोद की प्राथमिकता से त्यागपत्र देने का ऐलान कर दिया। उनका कहना था कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी में जाने का अभी कोई इरादा नहीं है। शाहजेब रिजवी ने कहा कि जयन्त अब पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचारधारा से भटक गए हैं।
पश्चिम उप्र में रालोद के 10 विधायक बने हैं। उन सभी में मुसलमानों का अच्छा खासा वोट है। मुसलमान उनके इस फैसले से आहत हैं। शाहजेब 14 अगस्त 2020 में तब चर्चा में आए थे जब बेंगलुरु हिंसा के मामले में कर्नाटक कांग्रेस के दलित विधायक अखंड श्री निवासमूर्ति के भतीजे पी नवीन का सिर काटने वाले को 51 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।
