पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने मोदी सरकार की सीजेपी प्रदर्शकों के खिलाफ नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए एक नई स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।




अन्नामलाई की भाजपा से अलग राह
चार महीने पहले भाजपा छोड़कर स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन शुरू करने वाले के. अन्नामलाई ने 21 अक्टूबर को “एक दुश्मन बनाने” का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने पीएम मोदी के 2011 के पुलिस कार्रवाई संबंधी कथनों का भी जिक्र किया, जो कि सरकार की वर्तमान नीति से अलग नजर आ रहे हैं।
अन्नामलाई ने अगस्त 2020 में भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा देने के बाद भाजपा ज्वाइन की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक इस आलोचना को एक स्वतंत्र पहचान बनाने का प्रयास मानते हैं, खासकर तब जब तमिलनाडु की राजनीति 2024 में विजय के नेतृत्व वाले तमिलगा वेट्ट्री कझगम (टीवीके) के प्रभाव से बदली है।
उन्होंने भाजपा की तमिलनाडु रणनीति से असहमति जताई है और “वी द लीडर्स” आंदोलन शुरू कर स्थानीय चुनावों के लिए आधार मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे 2031 तक राजनीतिक अहमियत बढ़ सके।
2011-ஆம் ஆண்டு, அப்போதைய குஜராத் முதலமைச்சர் திரு. @narendramodi அவர்கள், தனது கைகள் கட்டப்படாமல் இருந்திருந்தால், டெல்லிக்குச் சென்று மத்திய அரசுக்கு எதிராக கிளர்ந்தெழுந்திருப்பேன் எனக்கூறினார். டெல்லி ராம்லீலா மைதானத்தில் நடைபெற்ற ஊழலுக்கு எதிரான அமைதியான போராட்டத்தை காவல்துறை…
— K.Annamalai (@annamalai_k) October 21, 2026
सीजेपी विवाद: विरोध का अधिकार
विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद अन्नामलाई को भाजपा से अलग खड़ा करता है और प्रदर्शन के अधिकार जैसे बड़े मुद्दे पर उनकी छवि बनाता है। वे सरकार की आलोचना कर रहे हैं कि क्या वैधानिक प्रक्रियाओं के सवालों को असंवैधानिक करार देना उचित है।
वे यह भी सवाल उठा रहे हैं कि भाजपा की प्रतिक्रिया से क्या दबाव समूह को राजनीतिक ताकत बनने का मौका मिल रहा है।
राजनीतिक आधार तैयार करने की कोशिश?
राजनीतिक टिप्पणीकार मुकुंद पद्मनाभन के अनुसार, अन्नामलाई भाजपा के विचारधारात्मक आधार से पूरी तरह अलग नहीं हो रहे, बल्कि युवाओं और विभिन्न समुदायों को लेकर एक व्यापक राजनीतिक रणनीति बना रहे हैं।
अन्नामलाई ने 20 अक्टूबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सभी धर्मों के लोगों को देश में जगह देने वाले बयान का स्वागत किया था।
पद्मनाभन कहते हैं कि अन्नामलाई पुलिस कार्रवाई की कुछ घटनाओं को भाजपा की व्यापक विचारधारा से अलग दिखाना चाहते हैं और ऐसा करके युवाओं की भागीदारी, समावेशिता और सत्तावादी कार्यवाहियों के विरोध पर जोर दे रहे हैं।
फिर भी, अभी उनके राजनीतिक एजेंडे के बारे में निश्चित कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों की आलोचना
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, अन्नामलाई की हालिया स्थिति असंगत लगती है और केंद्र की आलोचना केवल भाजपा से दूरी बनाने का माध्यम हो सकती है, परन्तु यह उन्हें संगठनात्मक और चुनावी ताकत नहीं दिलाएगी।
विशेषज्ञ सुमंत रामन ने कहा कि अन्नामलाई की राजनीति में अभी स्पष्ट दिशा नहीं है और हिंदीनाडु में उनका प्रभाव कम हो गया है।
सीजेपी से जुड़ी नीतिगत असहमति अन्नामलाई को तत्काल बड़ी राजनीतिक सफलता नहीं देगी क्योंकि विपक्षी दल, क्षेत्रीय पार्टियां और आईएनडीआईए ब्लॉक अलग-अलग रुख रखे हैं।
भविष्य की अनिश्चितता
शैक्षिक विशेषज्ञ एवं राजनीतिक विश्लेषक रमू मनिवनन कहते हैं कि अन्नामलाई का उदय भाजपा द्वारा उन्हें तमिलनाडु का मुख्य नेता बनाने के प्रयास से जुड़ा था। लेकिन टीवीके की बढ़त और भाजपा के आंतरिक मतभेदों ने उनकी राह बदल दी।
बीजेपी ने उनसे अपेक्षित राजनीतिक लाभ न पाकर दिशा बदल ली, जिससे अन्नामलाई को अपनी राजनीति को फिर से परिभाषित करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अन्नामलाई ने अभी तक टीवीके सरकार पर सीधे आरोप नहीं लगाए हैं लेकिन भाजपा की आलोचना स्पष्ट हो चुकी है।

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