



गोरखपुर। सूर्य नारायण फाउण्डेशन लखनऊ के तत्वाधान में गोरखपुर की वरिष्ठ कवयित्री कीर्तिशेष निशी बाला श्रीवास्तवा की प्रथम पुण्यतिथि पर शास्त्री नगर पार्क गोरखपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ कवयित्री कीर्तिशेष निशी बाला श्रीवास्तवा की पुस्तक “यादों के झरोखों से” का विमोचन व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सत्या पाण्डेय पूर्व महापौर गोरखपुर, विशिष्ट अतिथि रीता श्रीवास्तवा उदघोषिका आकाशवाणी व दूरदर्शन, कार्यक्रम अध्यक्ष डा. रीना मिश्रा आदि ने मां शारदे के चित्र समक्ष दीप प्रज्जवलित करके किया व मां शारदे की वंदना सीमा नमन ने प्रस्तुत की जिसके पश्चात कीर्तिशेष साहित्यकारा निशी बाला श्रीवास्तवा की पुस्तक “यादों के झरोखों से” का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि सत्या पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कीर्तिशेष साहित्यकार निशी बाला श्रीवास्तव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा निशीवाला स्वभाव से बहुत ही विनम्र थीं यह उनकी विनम्रता एक कुशल साहित्यकार होने का परिचायक होता है यह उनका कविता संग्रह “यादों के झरोखों से” सदैव साहित्यकारों के हृदय पटल पर उनको विराजमान रखेगा।
देवरिया से पधारी कवयित्री डॉ रीना मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते कहा –
दीप सा है समर्पण तुम्हारे लिए
भाव के पुष्प अर्पण तुम्हारे लिए
थाल पूजा का लेकर खड़ी द्वार पर
नेह का है निमंत्रण तुम्हारे लिए
शाहजहांपुर से पधारे सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि विजय तन्हा ने श्रोताओं को खूब हंसाया –
न जाने किस तराजू में मुझे वो तोल देती है।
गिराकर पट निगाहों के पलों में खोल देती है।
यही होता मोहब्बत में हमारे साथ है अक्सर,
जिसे दिल में बसाता हूं वो भैया बोल देती है।।
देवरिया से पधारी ख्यातिलब्ध कवयित्री सीमा नयन ने माहौल को श्रृंगारिक बनाते हुए कहा –
जिंदगी बस ये सोच कर गुजरी
काश ये – वो नहीं हुआ होता।
अबके दिल तोड़ना सलीके से
ये रफू हर दफा नहीं होता।
कार्यक्रम संयोजक अमित कुमार श्रीवास्तव ने आज के समाज पर कहा-
सुदामा का मित्र घनश्याम अब नहीं।
सब ढूंढते हैं सीता कोई राम अब नहीं।
बाप दादा की दौलत तो चाहते हैं सब,
क्यूँ श्रवण सी होती संतान अब नहीं।।
मंच संचालन करते बाराबंकी से पधारे ओजस्वी कवि संजय शर्मा ने कहा –
मातृभूमि प्यासी आज शत्रुओं के खून की है।
दुश्मनों के रक्त से ये लाल होनी चाहिए।
हिना कौसर गोरखपुरी ने बेहतरीन गजलों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया –
चरण माता पिता के अपने मैं छू कर के आई हूं।
चरण की धुल माथे पे लगा कर के मैं आई हूं।
हिना तो नाम है मेरा जो थोड़ा प्यार मिल जाए,
मोहब्बत भाई चारे का यही पैगाम लाई हू।।
गोरखपुर की नवोदित कवयित्री रानी गौड़ ने कहा –
बहुत अन्तर है आसमान जमी मे
माना कि जन्नते है आंखो की नमी मे
हर दर्द बयां करती है वो तो हर घड़ी
आसान नही जिन्दगी किसी की कमी मे
कार्यक्रम के समापन पर सभी कवियों एवं कवत्रियों को माल्यार्पण एवं शाल्यार्पण कर मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
आगंतुकों का आभार कार्यक्रम आयोजन श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।




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