लूट सको तो लूट समिति के सचिवों की मनमानी पैसों का बंदरबांट




रामसनेहीघाट बाराबंकी।
धान खरीद को लेकर समितियों द्वारा धूल झोंका जा रहा है।केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है लेकिन खरीद का कांटा तेजी से भाग रहा है। धरातल पर तौल नहीं हो रही है। लेकिन कागजी खरीद का ग्राफ भाग रहा है। बनीकोडर के पीसीएफ केंद्र पर तौल कई दिनों से ठप है। लेकिन खरीद 300 क्विंटल प्रतिदिन दर्शाई जा रही है। किसी अफसर को यह नजर नहीं आ रहा है। धरातल पर तौल न होने से केंद्र भी समय से नहीं खुलता है। लेकिन तौल रोज होती है। यह अकेले बनीकोडर पीसीएफ का हाल नहीं है। अमूमन अधिकांश केंद्रों का यही दृश्य हैं। यहां 300 क्विंटल तक तौल दर्शाई जा रही है,कहीं 600 क्विंटल। यह हाल तब है जहां जिलें में सख्त डीएम शशांक त्रिपाठी की तैनाती हैं।
ये तो बहुत ही अच्छी बात है। किसान से न खरीदकर कोटा पूरा कर सरकारी कर्मचारी लाभान्वित हो रहे है। मीलर का धान भी सिरजा जा रहे है। सरकार को चूना लगाया जा रहा है। पूरे जगह यही चल रहा है। कागजों पर खरीद कर कोरम पूरा किया जा रहा है। जबकि डीएम शशांक त्रिपाठी जी बेहद अनुशासन वाले अधिकारी जाने जाते है। बताओ उनकी आंखों में भी धूल झोकी जा रही है। रामसनेहीघाट के थोरथिया में विपणन के दो केंद्र हैं। यहां पर विभाग की माने तो दोनों केंद्र पर खरीद पूरी क्षमता से दौड़ रही है। प्रतिदिन 600 क्विंटल के करीब खरीद होती है। यानी 2400 बोरी। हालांकि सोमवार को साढ़े 12 बजे तक तौल शुरू नहीं हो सकी थी। अभी देखना साढ़े 4 घंटे में दोनों केंद्र 600 क्विंटल की तौल कर देंगे। यह लोग कह रहे हैं। हालांकि यहां पर तौल पूरी पारदर्शिता से होती है। ऐसे में डीएम शशांक त्रिपाठी क्या इन सचिव और अधिकारी को दण्ड देंगे। लोगों का कहना है कि किसान क्रय केंद्रों के सचिव ऐसे नहीं करोड़पति बने हैं। किसानों के धान की तौल कैसे और कब होती है यह केवल किसान ही जानता है।

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