लेखक: अनिल तिवारी,वरिष्ठ पत्रकार की कलम से।
बांदा – सरकारें रासायनिक खाद पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी खर्च कर रही हैं, फिर भी खाद की किल्लत किसानों की बड़ी समस्या बनी हुई है। इस किल्लत के साथ-साथ रासायनिक खेती से मिट्टी, पानी और पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। इस संकट का समाधान केवल जैविक खेती और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली अपनाने में है।
रासायनिक खाद और पानी का प्रदूषण
रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और फसलों पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही यह जल स्रोतों को भी विषैला बना रहा है। रसायनों का बहाव बारिश या सिंचाई के पानी के साथ नदी, झीलों और भूजल तक पहुंचता है, जिससे पानी का प्रदूषण बढ़ता है। यह प्रदूषण न केवल पीने के पानी को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जलीय जीवों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रभावित करता है।
जैविक खेती अपनाने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। जैविक खाद और जैविक तरीके से की गई खेती में कोई हानिकारक रसायन नहीं होता, जिससे जल स्रोत सुरक्षित रहते हैं और पर्यावरण संरक्षित होता है।
जैविक खेती: पर्यावरण और पानी की सुरक्षा का उपाय
1. जल प्रदूषण पर रोकथाम: जैविक खेती में उपयोग किए जाने वाले खाद और कीटनाशक पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं, जिससे भूजल और सतही जल प्रदूषित नहीं होता।
2. मिट्टी और पानी का संरक्षण: जैविक खाद मिट्टी की संरचना को सुधारती है, जिससे पानी का अवशोषण बेहतर होता है और जल स्तर गिरने की समस्या कम होती है।
3.पर्यावरणीय संतुलन: जैविक खेती न केवल पानी को विषैला होने से बचाती है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी संरक्षित करती है।
सरकार और किसानों की जिम्मेदारी
आज रासायनिक खाद पर दी जा रही सब्सिडी का एक बड़ा हिस्सा यदि जैविक खेती को बढ़ावा देने में लगाया जाए, तो इससे पानी, मिट्टी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार को किसानों के लिए जैविक खाद बनाने के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने चाहिए और जैविक उत्पादों की खरीद-फरोख्त के लिए बाजार उपलब्ध कराना चाहिए।
किसानों को भी यह समझने की आवश्यकता है कि जैविक खेती न केवल उनके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि उनकी जमीन और पानी की सेहत को भी बेहतर बनाए रखेगी।
जैविक खेती के लाभों का विस्तार
1. स्वच्छ जल स्रोत: रासायनिक खाद के उपयोग में कमी लाकर जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
2. पर्यावरण की सुरक्षा: जैविक खेती से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
3. लागत में कमी: जैविक खाद किसानों द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार की जा सकती है, जिससे उनकी लागत घटती है।
4. समाज के लिए लाभकारी: जैविक उत्पाद रसायन-मुक्त होते हैं, जो आम लोगों की सेहत के लिए लाभदायक हैं।
निष्कर्ष
रासायनिक खाद से हो रहे जल प्रदूषण और खाद की किल्लत जैसे मुद्दों का समाधान अब केवल जैविक खेती में ही निहित है। जैविक खेती न केवल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि मिट्टी, पानी और पर्यावरण की सेहत को भी संरक्षित करेगी। सरकार और किसानों को मिलकर जैविक खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि जल, मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए देश की कृषि और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सके।





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