अखिल भारतीय मूल सचित्र संविधान मुद्रण अधिकार समिति की बैठक सम्पन्न
ललितपुर। अखिल भारतीय मूल सचित्र संविधान मुद्रण अधिकार समिति की कार्यकारिणी की बैठक कचहरी परिसर में हुयी, जिसमें मूल सचित्र संब्धिान मुद्रण के साथ संविधान की उद्देशिका में 1976 के 42वें संविधान संशोधन द्वारा डाले गये शब्द समाजवादी और पंथनिरपेक्ष को हटाये जाने के संबन्ध में विचार विमर्श हुआ। अध्यक्ष गोविन्द नारायण रावत ने कहा कि डा.भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में संविधान की उद्देशिका का जो प्रारूप बनाया गया था उसमें कहीं भी समाजवाद एवं पंथनिरपेक्ष शब्द इसलिये नहीं रखे गये थे, क्योंकि संविधान निर्माताओं ने चित्रों से भारतीय संविधान को सनातन संस्कृति के अनुरूप चालने के लिये निर्देशित किया ऐसा लगता है। कांग्रेस सरकार ने इस उद्देश्य को विफल करने के लिये सचित्र संविधान का कभी मुद्रण नहीं करवाया और लगभग 30 साल बाद जब देश में आपातकाल लगा हुआ था और सरकार के विरोध बोलना देशद्रोह तक की सीमा में निरूपित कर सभी विपक्ष को जेलों में डाल दिया गया था तथा प्रेस और न्यायपालिका पर पूरा दबाव था तब यह संशोधन कर दिया गया। इसलिये इस संशोधन को निरस्त करवाया जाना डा.भीमराव अम्बेडकर और सभी निर्माताओं की इच्छा का सम्मान करना होगा। उद्देशिका में संशोधन कर कांग्रेस सरकार ने उनका अपमान किया है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि सर्वोच्च न्यायपालिका संविधान निर्माताओं द्वारा निर्मित उद्देशिका के स्थान पर संशोधित उद्देशिका में संशोधन की संसद के अधिकार के बाहर मानती रही है. शायद सचित्र संविधान के बारे में न्यायपालिका में वाभी तथ्य ही नहीं रखे गये इसलिये उद्देशिका की वास्तविक स्थिति विचारित नहीं हुयी। इसलिये मारत के नौजवानों की यह बतलाया जाना आवश्यक है कि हमारे संविधान निर्माता बाबा साहब डा.भीमराव अम्बेडकर ने उद्देशिका में समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष शब्दों को रखने से परहेज किया था क्योंकि विभाजन के द्वारा बनाया गया पाकिस्तान इस्लाम धर्म का परिपालन कर रहा था इसलिये भारत को सनातन संस्कृति के अनुसार अनुशरण करना उन्होंने सही माना इसलिये चित्री के माध्यम से सनातन संस्कृति के संदेश उत्कीर्ण कराये। सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री से मांग की जाये कि संविधान में किये गये 42वें संशोधन के द्वारा उद्देशिका में रखे गये शब्द समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष को हटाया जाये एवं मूल सचित्र संविधान का मुद्रण सुनिश्चित कराया जाये जिससे भारत की जनता को इसके साथ ही अंग्रेजी और हिन्दी में मुद्रित किये जा रहे संविधान को शब्दों में भी सही अर्थ नहीं लिखे जा रहे हैं। इस पर कोई कानून बनाया जाये जिससे अंग्रेजी और हिन्दी में एक ही भाव के शब्द लिखे जाये। जैसे अंग्रेजी में फेल्थ शब्द को हिन्दी में धर्म शब्द से लिखा गया है जो प्रांनिड उत्पन्न करता है इसलिये भारत सरकार के प्रकाशन से सभी को विबंद्ध किया जाये कि वे सही शब्दों का मुद्रण करें। इस बैठक में समिति अध्यक्ष गोविन्द नारायण रावत एड., उपाध्यक्ष रमेश कुमार पाठक (रवीन्द्र), उपाध्यक्ष डा.राजेन्द्र श्रीवास्तव, महामंत्री दीपक पाराशर, सहमंत्री मुकेश भार्गव, सहमंत्री पहलवान सिंह कुशवाहा एड., कोषाध्यक्ष गिरजा शंकर दुबे, कार्यकारिणी सदस्य, रमेश सिंह एड., भगवत प्रसाद पाठक एड., राजेन्द्र प्रसाद पटेल एड., प्रभूदयाल सेन एड., अजय सिंह तोमर एड., रामप्रकाश शर्मा एड. आदि मौजूद रहे।





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