नई दिल्ली: कांग्रेस की अगुवाई वाले 21 INDIA ब्लॉक दलों ने शनिवार को पहली बार मॉक पार्लियामेंट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ग्यानेश कुमार का “अभिशपथ” लिया। छह बिंदुओं वाले प्रस्ताव में उन पर चुनावी हेरा-फेरी, मतदाता सूचियों से करोड़ों नाम हटाने और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से समझौता करने का आरोप लगाया गया और तत्काल हटाने की मांग की गई।




मुख्य आरोप और प्रस्ताव
भारत के विपक्षी दलों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर, 10 राजाजी मार्ग, पर मॉक पार्लियामेंट में इस प्रतीकात्मक ‘अभिशपथ’ को आयोजित किया। इस प्रक्रिया की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मेज़रा कुमार ने की, जबकि खड़गे ने CEC के खिलाफ प्रस्ताव रखा।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने इस सार्वजनिक अभिशपथ का प्रस्ताव पेश किया।
- चुनावी हेरा-फेरी: भाजपा साजिश का हिस्सा बताते हुए मतदाता सूची में संशोधन का आरोप।
- SIR विलोपन: 13.2 करोड़ मतदाताओं को हटाने का आरोप।
- फॉर्म 6 में बदलाव: बिना संसदीय अनुमोदन के बदलाव से नए मतदाताओं की नामांकन प्रक्रिया प्रभावित।
- केन्द्रीयकरण: ERONET और ECINET के माध्यम से नियंत्रण केंद्रीकरण का आरोप।
- आयोग के सदस्यों का बहिष्कार: दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप।
- संवैधानिक उल्लंघन: भाजपा के पक्ष में कार्य करना, विपक्ष के नेताओं को सुनवाई से वंचित रखना।
वोट चोरी और विपक्ष की प्रतिक्रियाएँ
राहुल गांधी ने कहा कि विशेष तीव्र संशोधन (SIR) में 13.3 करोड़ मतदाता हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का 15 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि ये मतदाता पिछले लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेते थे, जिसमें विजय अंतर मात्र 3 प्रतिशत था। चुनाव आयोग खुद 2024 का चुनाव अवैध मान रहा है। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि वोट चोरी करने वालों को कोई क्षमा नहीं मिलेगी।
खड़गे ने कहा कि इसे पहले बिहार में लागू किया गया और बाद में देशभर में गैर-भाजपा मतदाताओं को हटाने के लिए इस्तेमाल किया गया। वे मृत मतदाताओं को सूची से हटाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आरोप है कि मोदी सरकार अपने राजनीतिक राजनीतिक गलतीयों को छुपाने के लिए “आतंकवादियों” का बहाना बना रही है।
सागरिका घोष ने कहा कि बंगाल चुनाव 2026 छिन लिया गया है, और मोदी-शाह-ग्यानेश गठबंधन और चुनाव चोरी करने नहीं देगा।
समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग नागरिकों के वोटिंग अधिकार छीन रहे हैं, और ईवीएम के बहाने वोट चोरी हो रही है।
शिव सेना के अरविंद सावंत ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर सवाल उठाया, जहां 2024 में दोपहर 4 से 5 बजे के बीच 40 लाख वोट पड़े। उन्होंने CEC से वीडियो सबूत मांगा, जो अभी तक नहीं मिला।
अन्य विपक्षी नेताओं के आरोप
सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास ने बताया कि उन्हें भी वोटर के रूप में सुनवाई में दो बार जाना पड़ा, जो आम नागरिक की स्थिति दर्शाता है।
स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने कहा कि ग्यानेश कुमार ने चुनाव आयोग और देश की विश्वासनीयता को दागदार किया।
राजद के अभय कुशवाहा ने कहा कि उन्हें तुरंत हटाना चाहिए और देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। बिहार में 47 लाख नाम हटाए गए।
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के सुदामा प्रसाद ने गिरफ्तारी और मुकदमे की मांग की।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैद्यनाथ राम ने SIR को वोट चोरी का अभ्यास बताया और राजद्रोह का केस करने की मांग की।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर CEC को “मानिपुलेटर” और “राजनीतिक अपराधी” कहा।
मतदाता अनुभव और समापन
कुछ नागरिक जो SIR में हटाए गए थे, आवाज़ उठाईं। कोलकाता से दिल्ली आने वाली अनिता जैसवाल ने पूछा कि उनका वोट क्यों काटा गया, और पुराना वोटर कार्ड वापस मांग किया।
सामाजिक कार्यकर्ता निखिल देय, कांता प्रसाद, माया देवी और कमाल भी अपनी कहानी लेकर आए, जिनके नाम हटाए गए।
यह कार्रवाई विपक्ष का लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली को बचाने का प्रयास है और इसका बड़ा असर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर होगा।

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