नई दिल्ली : जिन लोगों ने होम लोन ले रखा है, उन्हें इंतजार है कि ब्याज दरों में निकट भविष्य में कमी कब आएगी। पिछले कुछ समय के दौरान इनकी ईएमआई या लोन की अवधि बढ़ा दी गई है। पिछले साल मई के बाद से अब तक रिजर्व बैंक ने आम बैंकों के लिए अपनी पॉलिसी ब्याज दरों में 250 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है। आम आदमी यूं समझे कि उसके लिए यह बढ़ोतरी ढाई फीसदी है। इससे फिक्स्ड डिपॉजिट कराने वाले लोगों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन जिन लोगों ने लोन ले रखा है, उनके लिए मुश्किल बढ़ चुकी है।




महंगाई अकेली नहीं : भारत के सामने सिर्फ महंगाई की चुनौती नहीं हैं। अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग सेक्टर में उथल-पुथल मची है। मामला गंभीर निकला तो भारत की इकॉनमी पर भी इसकी आंच आ सकती है। कच्चे तेल के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अगर कच्चे तेल के भाव बढ़े तो महंगाई फिर आग लगा सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर भले ही दुनिया के मुकाबले काफी तेज दिख रही है, लेकिन अब बढ़ोतरी थमने के संकेत मिलने लगे हैं।
मिसाल सामने है : हाल में सबसे खतरनाक संकेत तब दिखा, जब अमेरिका में सिलिकॉन वैली बैंक का कारोबार चौपट हो गया। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बाजार में जो नए बॉण्ड आए, उन पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगा। इससे बैंक के पुराने बॉण्ड्स में निवेश की वैल्यू कम हो गई। इसी दौर में सिलिकॉन वैली बैंक को जमाकर्ताओं को रकम लौटाने के लिए अपना निवेश भुनाना पड़ गया, जो उसके लिए नुकसानदेह साबित हुआ। अमेरिका के कुछ और बैंक कमजोर ग्राउंड पर खड़े दिख रहे हैं।
थोड़ा वक्त लगेगा : ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि भारत में अगले साल जनवरी से ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत हो सकती है। अगर महंगाई दर की स्थिति बेहतर रही तो कटौती उससे पहले भी हो सकती है। गोल्डमैन सैक्स कंपनी ने भी जनवरी से ब्याज दरों में कटौती का अनुमान लगाया है। एक अनुमान ये है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जब ये फैसला कर लेगा कि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी नहीं करनी, उसके पांच छह महीने के बाद रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटोती का फैसला ले सकता है।

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