हमीरपुर ब्यूरों-
सुमेरपुर ब्लॉक में विकास योजनाओं के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार ने अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा ली हैं कि सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है। खासकर, मनरेगा योजना के तहत जल रोक बांध, चक मार्ग खुदाई के नाम पर जमकर गड़बड़ी की जा रही है। मजदूरों के नाम पर फर्जी डिमांड लगाकर सरकारी धन की बंदरबांट हो रही है, लेकिन जांच के नाम पर प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से मौन है
सुमेरपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत तालाब खुदाई व जल रोक बांध के कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार,कैथी ग्राम पंचायत में क्षेत्र पंचायत द्वारा जलरोक बांध भोला श्रीवास के खेत से किसवाही डांडा तक और अतरैय्या ग्राम पंचायत में विश्राम पाल के मकान से मौहर डांडा तक खुदाई के नाम पर मशीनों का इस्तेमाल किया गया था और आज भी फर्जी मजदूरों की डिमांड लगाकर रुपए निकाले जा रहे है, लेकिन कागजों में मजदूरों द्वारा काम कराए जाने का दावा किया गया है। 18 जनवरी 2025 को फर्जी डिमांड के जरिए कैथी में 221 मजदूरों को दिखाया गया है और अतरैया में 108 मजदूर दिखाए गए है जबकि आज के समय में कोई खेत खाली नहीं है मिट्टी की खुदाई नही की जा सकती है सबसे बड़ी बात यह है कि फोटो पुरानी लगी हुई है।लाखों रुपये सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि मजदूरों को पास खड़ा करके फोटोग्राफी की गई है और पुराने समय की खुदाई के कार्य को वर्तमान का दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। वास्तविकता में रात के समय मशीनों से खुदाई कराई जाती है और फिर कागजों में इसे मजदूरों के श्रम का परिणाम बताया जाता है। इसी प्रकार मवईजार ग्राम पंचायत में जेसीबी से कार्य किया गया था जिसका संज्ञान अधिकारियों द्वारा लिया गया तो पाया गया की वास्तविक में काम मशीनों द्वारा किया गया जिसके बाद कार्य को श्रमदान घोषित किया गया था।इसी प्रकार ग्राम पंचायत बिलहड़ी के मढ़ी दाई तालाब खुदाई में मशीनों द्वारा कार्य करवाकर काम कराया गया था। मशीनों द्वारा काम करवाया गया और 15 जनवरी को 188 मजदूरों की डिमांड लगाई गई अखबारों में भी प्रकासित हुआ जिसका संज्ञान लेकर जब अधिकारियों ने जांच की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई।ग्राम पंचायतों में तालाब खुदाई हो या चकमार्ग,जालरोक बांध के नाम पर हो रही धांधली की शिकायतें कई बार अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो जांच शुरू हुई और न ही कोई अधिकारी मौके पर सत्यापन के लिए पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इन मामलों ने सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़ा कर दिया है लेकिन यहां भी मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर प्रशासन से बार-बार अपील की है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से इन गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके सुमेरपुर ब्लॉक में हो रही इन गड़बड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार पर सरकार की सख्त नीतियां भी यहां बेअसर साबित हो रही हैं। यदि समय रहते इन अनियमितताओं को नहीं रोका गया, तो विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन संभव नहीं होगा। सुमेरपुर ब्लॉक में तालाब,चकमार्ग,जलरोक बांध खुदाई के नाम पर हो रही धांधली ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। ग्रामीणों ने इस मामले में शीघ्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि दोषियों को सजा दी जा सके और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सके।





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