अखिल भारतीय किसान सभा के 90वें स्थापना दिवस पर किसानों ने संगठन को मजबूत करने का लिया संकल्प




अखिल भारतीय किसान सभा के 90वें स्थापना दिवस के अवसर पर चित्रकूट में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कामरेड रुद्र प्रसाद मिश्र ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय किसान सभा पूरे देश में किसानों का सबसे बड़ा और सबसे पुराने संगठनों में से एक है, जिसकी स्थापना 11 अप्रैल 1936 को स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा कानपुर में की गई थी।
उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और जमींदारी प्रथा के शोषण के खिलाफ किसानों को संगठित करना, लगान कम कराना तथा किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना था। सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में किसान सभा आंदोलन ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के बाद जमींदारी उन्मूलन कानून बनने से किसानों को भूमि के अधिकार मिले।
कार्यक्रम की शुरुआत किसान सभा कार्यालय में महिला किसान सुंता और उत्तर प्रदेश किसान सभा राज्य काउंसिल सदस्य कामरेड पूनम द्वारा किसान सभा का झंडारोहण कर की गई। इस दौरान किसानों ने “किसान सभा जिंदाबाद” के नारे लगाए। सभा की अध्यक्षता कामरेड बीर बहादुर सिंह ने की।
किसान सभा चित्रकूट के पूर्व जिलाध्यक्ष कामरेड चुनकू राम पाल ने कहा कि 1936-37 के दौरान किसान सभा जमींदारों और ब्रिटिश हुकूमत की शोषणकारी नीतियों के खिलाफ एक प्रमुख आवाज बनकर उभरी थी। उन्होंने कहा कि आज फिर किसानों के खिलाफ पूंजीवादी शोषणकारी नीतियां बनाई जा रही हैं, इसलिए किसानों को एकजुट होकर किसान सभा को मजबूत करना होगा।
जिलाध्यक्ष विजय कुमार ने “हर गांव में किसान सभा, हर किसान किसान सभा” का नारा बुलंद करते हुए सभी किसानों से गांव-गांव में किसान सभा स्थापना समारोह मनाने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षता कर रहे बीर बहादुर सिंह ने समापन भाषण दिया। इस अवसर पर चुन्नू राम, मिथलेश, सोनम, सुंता, छेदी राम, दीपक, रनुआ, राजकली, लक्ष्मण, गुलजार, विनीत, विकास, सनीश, शिव प्रसाद, शिवमोहन सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।




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