रविवार को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि वे परेशान और बेचैन हैं, और उनका “झोला उठाने का समय” करीब आ रहा है। यह प्रतिक्रिया मोदी के राजनीतिक विरोधियों को ‘दिमागी नक्सली’ कहने के बाद आई।




मोदी का ‘दिमागी नक्सली’ बयान
मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में दीपावली के अवसर पर सीआरपीएफ कैंप में सुरक्षा कर्मियों के साथ अपने पारंपरिक कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि हथियारबंद माओवादियों को समाप्त कर दिया गया है, लेकिन “दिमागी नक्सली” कई राजनीतिक पार्टियों और संगठनों में घुसपैठ कर चुके हैं और लोगों को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़काया जा रहा है।
कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के महासचिव, संचार प्रभारी जयराम रमेश ने ट्विटर पर कहा कि प्रधानमंत्री ने दीपावली के दिन भी अपनी “ट्रेडमार्क गाली” नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि मोदी ने ग़ैर-राजनीतिक अवसर का दुरुपयोग कर सुरक्षा बलों की पोशाक पहन कर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर अपशब्द कहे। यह संस्थागत नियमों का एक निर्मम उल्लंघन है।
मोदी के पिछले बयान और कांग्रेस की टिप्पणियां
जयराम रमेश ने याद दिलाया कि मोदी ने अप्रैल 2024 में जाति जनगणना मांगने वालों को शहरी नक्सली कहा था, और बाद में अप्रैल 2025 में यह घोषणा की कि जाति जनगणना 2027 की जनगणना के हिस्से के रूप में होगी। उन्होंने सितंबर 2020 में तीन काले कृषि कानूनों के विरोधियों को नक्सली विचारधारा के समर्थक बताया था, और नवंबर 2021 में उन कानूनों को वापस ले लिया गया।
मोदी का माओवाद और नक्सली नीति पर बयान
मोदी ने कहा कि सरकार ने नक्सलियों और अलगाववादियों के वित्तपोषण पर बड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इसे देश की सही नीतियों और सशक्त राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत बताया। उन्होंने आगाह किया कि हथियारबंद नक्सली गायब हो गए हैं, लेकिन उनकी विचारधारा के समर्थक अभी भी कई संगठनों में नियंत्रण स्थापित किए हुए हैं। उन्हें पहचाने जाने और हराने की जरूरत है ताकि देश सुरक्षित रहे।
इससे पहले अगस्त में अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी मोदी ने ‘दिमागी नक्सली’ का जिक्र किया था, कहा था कि देश ने हथियारबंद नक्सली उन्मूलन में सफलता पाई है, लेकिन उनकी विचारधारा वाले अभी भी हिंसा को बढ़ावा देने के मौके ढूंढ़ रहे हैं।

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