

कृष्ण युग में ही गौप्रेम के अंकुर फूटे, जब बाल कान्हा ने आज के दिन गौचारण का शुभारंभ किया। ब्रजवासियों को इन्द्र के कोप अहंकार का ग्रास बनने से बचाने गोवर्धन पर्वत का रक्षा कवच दिया। कई युगों की यात्रा करते हम आ पहुंचे कलियुग में। अहंकार अब पग पग है। ऐसे में बेजुबानों की आंखों से झरती पीर की बिसात ही क्या…इसे बांचने का जतन ही कहाँ…! पर नहीं…गौचारण में बसे आचरण को वसुधैवकुटुम्ब में समाहित करने की मुहिम भी इस कुपित अहंकार के बरअक्स जारी है। इस मुहिम को खंगालते मुलाकात हुई गौ धन को जतन से सहेजते, समृद्ध बनाते, सनातन परंपरा को जीवन शैली में उतारते, शुद्धता, जैविकता में देश को अग्रिम बनाने का सपना संजोने वाले किसान, व्यापारी, उद्योगपति और सबसे बढ़कर पर्यावरण, गौ प्रेमी डॉ. अतुल गुप्ता से, जिनका दूसरा नाम जैविक गुरु भी है…
जैसा अन्न वैसा मन
बात गौ धन पर है…गौ सम्पदा पर है…और हमारे आचरण पर भी। जाहिर है यह खानपान से भी जुड़ा है। लोक कहावत कि जैसा खाओ अन्न, वैसा होगा मन। इससे इत्तफाक रखते अतुल कहते हैं कि हम और हमारे जीव जानवर जहरीला नकली मिलावटी खाद्य खाने और तमाम बीमारियों को ढोने को मजबूर हैं। स्वस्थ गायों की खूबसूरती तसवीरों में सिमट के रह गई है। यहां पिंजरापोल गौशाला में तीन हजार करीब गौवंश है, जिनकी बेहतरी के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं।
जैविक गुरु अतुल की डगर
पच्चीस बरस से जारी सफर!
किसानी न्यारी
डॉक्टर अतुल गुप्ता की शख्सियत को किसी एक परिधि में समेटना मुश्किल है। एक अतुल में अनेक अतुल होने की वे रोचक बानगी हैं। जीवन रंगमंच पर विविध किरदार अदा करने में वे माहिर हैं। एक किरदार प्रगतिशील किसान का है। पारंपरिक भारतीय किसान की दयनीय उदासीन छवि पर उन्हें गहरी कोफ्त है। वे कहते हैं, हमारा किसान अमेरिका के किसान जैसा सम्पन्न क्यों नहीं है? हमारा गौधन उपेक्षित क्यों है..? इन यक्ष प्रश्नों का जवाब भी वे अपने तरीके से दे रहे हैं। हर माह वे गौधन की महत्ता बताने और किसानों को प्रगतिशील बनाने गुलाबीनगरी की पिंजरापोल गौशाला स्थित सनराइज जैविक प्रशिक्षण आश्रम में देशभर से पहुंचे किसानों को प्रशिक्षित करते हैं।
चतुर व्यापारी
श्रोता किसान प्रगतिशीलता के पायदानों पर कदम रखते हैं कि अतुल सफल व्यापार का चतुर चेहरा नजर आने लगते हैं। बकौल अतुल…
पैसे को हटादे…
फिर पूछ कौन है तू
जवाब यह मिलेगा
धरती का बोझ है तू!
हास्य में लिपटा कटु सत्य ही है उक्त पंक्तिया! इनके पीछे झांकते जीवन के झंझावात, संघर्ष, कई बार की असफलता ही वे कारक हैं जो अतुल को सफल अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार दिग्गजों की पंक्ति में खड़ा करते हैं।
जुझारू अतुल
2030 तक राजस्थान को पूरी तरह जैविक राज्य बनाने का आत्मविश्वास अतुल के जुझारूपन को इंगित करता है और उनके एक और किरदार जैविक गुरु को भी।
रिकॉर्ड तोड़ गोबर निर्यातक
गौवंश की बिखरी सम्पदा को गौधन प्रेमी शिद्दत से समृद्ध कर रहे हैं। गत एक बरस में तीन सौ करोड़ कीमत के गाय गोबर व उत्पादों का निर्यात देश से अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में हुआ। इस्लामिक देश कुवैत बड़ा खरीदार है। खजूर की खेती में इसका उपयोग वहां है। आगामी बरसों में इसे दस हजार करोड़ ले जाने का लक्ष्य है।
कुदरत में प्रभु का वास
दैवीय खेजड़ी का पेड़
पिंजरापोल गौशाला स्थित जैविक पादप पौधशाला में सैकड़ो औषधीय जैविक पौधों की भरमार है। मसलन काली हल्दी, तुलसी, आंवला, शतावरी, अश्वगंधा, सर्पगंधा, पारिजात आदि। इन्हीं के संग प्रशिक्षण आश्रम के बाहर परिवार के बड़े बुजुर्ग की सी शान बिखेरता खेजड़ी का त्रिदिशा सर्पाकार विशाल खेजड़ी का वृक्ष। इसमें विराजे हैं अभयदान देते प्रभु काल भैरव। यहाँ जो भी आता है, इन औषधीय पेड़ पौधों और बाबा वृक्ष खेजड़ी के दर्शन से उपजी गहरी आध्यात्मिक अनुभूति व नयनाभिराम हरियाली के आनंद रस में डूबे बिना नहीं रहता। दरअसल खेजड़ी मरुस्थल की सजीवनी है।




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