समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047-समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अतर्गत दिनांक 29 अक्टूबर, 2025 तक 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों-छात्र, शिक्षक, व्यवसायी, उद्यमी, कृषक, स्वयं सेवी संगठन, श्रमिक संघटन, मीडिया एवं आम जनमानस के साथ विगत 8 वर्षों से प्रदेश की विकास यात्रा के संबंध में जानकारी दी गई तथा विकास हेतु रोड मैप पर चर्चा कर फीडबैक प्राप्त किया गया।




आम जनमानस की राय एवं सुझाव प्राप्त करने हेतु विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक कुल 63,38,511 फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 50,12,139 सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 13,26,376 सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। इनमें 31,04,842 सुझाव आयु वर्ग 31 वर्ष से कम, 29,33,449 सुझाव 31-60 वर्ष के आयु वर्ग, तथा 3,00,224 सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से प्राप्त हुए हैं। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों का विवरण निम्न प्रकार है:- कृषि-16,31,196, पशुधन एवं डेरी-2.51,545, इंडस्ट्री-2,27,239, आईटी एवं टेक-1,77,629, पर्यटन-1,50,019, ग्रामीण विकास-12.50,409, इन्फ्रा56,995, संतुलित विकास-89,948, समाज कल्याण-4,90,532, नगरीय एवं स्वास्थ्य-4,30.759, शिक्षा क्षेत्र-14,63,471 तथा सुरक्षा सम्बंधित 1,18,775 सुझाव मिले हैं। जनपदों के अनुसार फीडबैक में टॉप पांच में जौनपुर (5,71,449), संभल (5,05,719), गाजीपुर (2,55,776), हरदोई (1,95,411) और प्रतापगढ़ (1,80,692) शामिल हैं। वहीं बॉटम पाँच में इटावा (21,093), हापुर (29,863), महोबा (30,020), ललितपुर (31,207) और गौतमबुद्ध नगर (31,979), से न्यूनतम फीडबैक प्राप्त हुए हैं।
सीतापुर से प्रदीप कुमार शर्मा का सुझाव है कि “लखनऊ से प्राचीन एवं प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य, के लिए कोई भी ट्रेन नहीं है जोनो की पॉलिटिक्स की वजह से लखनऊ सीतापुर बालामऊ लखनऊ के लिए कोई रिंग रेल सेवा की मांग के बावजूद भी प्रस्ताव नही तैयार किया गया सीतापुर राजधानी लखनऊ का पडोसी जिला है व राजधानी लखनऊ को सीतापुर शाहजहाँपुर रूट के द्वारा सीधे दिल्ली, देहरादून, जयपुर आदि राजधानियों व हरिद्वार, मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज, कोलकाता, गुवाहाटी जैसे बड़े शहरो को सीधी रेल लाइन से जोड़ता है। जोनो की पॉलिटिक्स की वजह से सीतापुर से गोरखपुर व पंजाब को छोड़कर किसी जगह के लिए कोई सीथी ट्रेन नही चलती है क्योकि सीतापुर का दुर्भाग्य यह है कि NER के पास मात्र लखनऊ से सीतापुर तक का ही रेलखंड है। दोनों जोन एक दुसरे के प्रति सौतेला व्यवहार करते है और इस महत्त्वपूर्ण रेलखंड को लावारिश बना दिया है।”
सहारनपुर अनुराग मलिक कहते हैं कि “उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और सुशासन को मजबूत बनाने के लिए पुलिस तंत्र को स्मार्ट (SMART -सख्त, नैतिक, जवाबदेह, संवेदनशील और तकनीक सक्षम) बनाया जाए। अपराध नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे CCTV निगरानी, डायल 112, ड्रोन, और अपराध डेटा विश्लेषण को और व्यापक बनाया जाए। महिला, वृद्धजन और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष तंत्र और फास्ट ट्रैक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुशासन के लिए सभी सरकारी सेवाओं को डिजिटल और समयबद्ध किया जाए। ई-गवर्नेस, जनसुनवाई पोर्टल, RT। और लोक सेवा गारंटी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन ज़रूरी है। हर स्तर पर पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। जनता की भागीदारी, तकनीक का उपयोग और प्रशासन की संवेदनशीलता ही सुरक्षित और सुशासित उत्तर प्रदेश की नींव बन सकते हैं।”
चंदौली से अमर प्रकाश ज्योति का सुझाव है कि ‘ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का अभाव एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसे सुधारने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं: 1. इन्फ्रास्ट्रक्बर में सुधारः स्कूलों की बिल्डिंग, टॉयलेट्स और पुस्तकालयों का विकास किया जाना चाहिए। अच्छे वातावरण में बच्चों की पढ़ाई की क्षमता बढ़ती है। 2. शिक्षकों की ट्रेनिंगः शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए ताकि वे नई शिक्षण विधियों और तकनीकों से अवगत हो सकें। 3. टेक्नोलॉजी का उपयोगः ऑनलाइन कक्षाओं, ई-लर्निंग प्लेटफार्मों और शिक्षा ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह छात्रों को अधिक संसाधन और ज्ञान तक पहुंच प्रदान करेगा। 4. अवधान और संवेदनशीलताः ग्रामीण समुदायों में शिक्षा के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएँ और कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। 5. छात्रवृत्ति और सहायताः आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्तियाँ और अन्य वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे शिक्षा को जारी रख सकें। 6. परिवार का सहयोगः अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। 7. मिशन स्कूल और सामुदायिक शिक्षण केंद्र: समुदाय के भीतर स्कूलों की स्थापना या सामुदायिक शिक्षण केंद्रों की मदद से बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित किया जा सकता है। 8. असामानता का समाधानः लड़कियों और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के बच्चों को प्राथमिकता देकर उनकी शिक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। 9. स्वास्थ्य सेवाएँ: बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। यदि बच्चे स्वस्थ नहीं है, तो उनकी शिक्षा पर भी असर पड़ेगा। 10. सामाजिक प्रतिभागिताः स्थानीय लोगों को शिक्षा के कार्य में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि समुदाय का सहयोग बढ़े। इन उपायों को अपनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।”
इस महाभियान के सम्बन्ध में जनसामान्य को अवगत/जागरूक किये जाने हेतु नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, आदि पर विभिन्न बैठकों एवं सम्मेलनों/गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। अभी तक 215 नगर पालिकाओं में बैठकें एवं 228 नगर पालिकाओं में सम्मेलन/गोष्ठियाँ तथा 18 नगर निगमों में बैठकें एवं 18 नगर निगमों में सम्मेलन/गोष्ठियाँ आयोजित की गई हैं। इसी प्रकार 64 जिला पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 61 जिला पंचायतों में बैठकें, 557 नगर पंचायतों में बैठकें और 578 नगर पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियाँ एवं 767 क्षेत्र पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 767 क्षेत्र पंचायतों में बैठकें सम्पन्न हुई हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 51,012 ग्राम पंचायतों के स्तर पर भी बैठकों का सफल आयोजन किया गया है।
इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के बीच संवाद-सम्पर्क को और अधिक सशक्त किया गया है। माननीय मुख्यमंत्री की विजन समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अनुरूप प्राप्त सुझावों एवं फीडबैक के आधार पर विजन डाक्यूमेंट्स के निर्माण हेतु प्रदेश सरकार द्वारा यह प्रक्रिया निरंतर गतिशीलता के साथ जारी है।
प्रदेश सरकार का यह प्रयास सामूहिक भागीदारी एवं समन्वित विकास को सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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