

विश्व पुस्तक मेले के थीम पवेलियन में दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी की स्मृति में यादगार कार्यक्रम सम्पन्न।
नई दिल्ली। थीम पवेलियन, भारत मंडपम, विश्व पुस्तक मेला–2026 में दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी पर भारतीय सेना को समर्पित भावपूर्ण आयोजन मंगलवार दिनांक 13-1-26 को अद्विक पब्लिकेशन द्वारा आयोजित किया गया, “दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिये…”। विश्व पुस्तक मेले के अंतर्गत भारतीय सैन्य इतिहास से जुड़े “शौर्य और प्रज्ञा” कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज थीम मंडप पर एक विशेष साहित्यिक, सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम भारतीय सेना को समर्पित था और प्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी की स्मृति में आयोजित किया गया। अद्विक पब्लिकेशन प्रा. लिमिटेड के सौजन्य से आयोजित इस सत्र का समय प्रातः 11:00 से 11:45 बजे तक रहा। कार्यक्रम का शीर्षक था— “द कंट्रीब्यूशन ऑफ आनंद बख्शी : ए पोएट एंड लिरिसिस्ट। कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में आनंद बख्शी द्वारा लिखा गया देशभक्ति गीत “दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए गूंजता रहा। जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कर दिया। पैनल चर्चा में राकेश आनंद बख्शी, यूसुफ खान, संगीता विजित और शालिनी अगम उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आनंद बख्शी के पुत्र राकेश आनंद बख्शी ने अपने पिता के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्ष 1945 की एक मार्मिक घटना साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद आनंद बख्शी ने साहित्य और गीतों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। राकेश आनंद बख्शी ने कहा कि उनके पिता के गीत केवल मनोरंजन नहीं थे, बल्कि वे आम जन की भावनाओं, देशप्रेम और जीवन के यथार्थ को स्वर देते थे। उन्होंने कुछ व्यक्तिगत संस्मरण भी साझा किए, जिन्हें श्रोताओं ने अत्यंत भावुकता से सुना। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि यूसुफ खान, जो एक प्रतिष्ठित संगीतकार हैं और फिल्म एवं संगीत जगत की कई नामी हस्तियों के साथ काम कर चुके हैं, ने आनंद बख्शी की बायोग्राफी ‘नगमे किस्से बाते यादें’ पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह कृति न केवल एक गीतकार की जीवन यात्रा को दर्शाती है, बल्कि हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर का भी दस्तावेज है।
कार्यक्रम की शुरुआत शालिनी अगम (राष्ट्रीय अध्यक्ष–किआन फाउंडेशन) ने “जय हिंद” के उद्घोष के साथ की, जिससे पूरे मंडप में उत्साह का संचार हो गया। उन्होंने पुस्तक मेले की इस थीम की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य और राष्ट्रभाव को जोड़ने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।कार्यक्रम का शानदार मंच संचालन ऋषि कुमार शर्मा (पूर्व उप-सचिव हिन्दी अकादमी) द्वारा किया गया। अंत में अद्विक पब्लिकेशन के निदेशक अशोक गुप्ता ने आये हुये सभी सम्मानित अतिथियों एवं एनबीटी की टीम का आभार प्रकट किया। संगीता बिजित, जो पेशे से बीटेक स्नातक हैं, ने मंच से श्रीराम के श्लोक “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” का पाठ किया। इसके बाद उन्होंने देशभक्ति गीत “वतन वालो वतन न बेच देना, ये धरती ये गगन न बेच देना” गुनगुनाया, जिसने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम आनंद बख्शी के साहित्यिक योगदान, देशभक्ति की भावना और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का सशक्त संगम साबित हुआ, जिसने विश्व पुस्तक मेला–2026 में एक यादगार छाप छोड़ी।




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