




विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश



विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि यद्यपि अभी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की बात खुलकर की जा रही है किंतु वस्तुत: प्रदेश सरकार संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने की तैयारी कर रही है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि 220 केवी और इससे अधिक क्षमता के विद्युत उपकेंद्रों और लाइनों का कार्य टी बी सी बी प्रक्रिया के तहत देने का निर्णय वस्तुतः पूरे ट्रांसमिशन सेक्टर के निजीकरण का राजमार्ग है। 100 करोड रुपए की लागत से अधिक की ट्रांसमिशन परियोजनाओं पहले ही टी बी सी बी प्रक्रिया के तहत निजी घरानों को दी जा रही हैं।
उत्पादन के क्षेत्र में जहां उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 31000 मेगावॉट है वहां उत्तर प्रदेश का सरकारी क्षेत्र का कुल उत्पादन इसका पांचवा हिस्सा लगभग 6000 मेगावॉट है। प्रदेश में नई बिजली परियोजनाएं बड़े पैमाने पर निजी घरानों को पहले ही दी जा चुकी है। अब प्रदेश के सबसे बड़े आनपारा और ओबरा ताप बिजली घर के एक्सटेंशन प्रोजेक्ट को ज्वाइंट वेंचर में मेजा थर्मल प्राइवेट को देना उत्पादन निगम के समाप्ति की तैयारी है।
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के लगातार 286 वें दिन आज बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों , जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। बिजली कर्मियों ने संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती संघर्ष जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि शीर्ष प्रबन्धन की निजी घरानों के साथ मिलीभगत है और साढ़े नौ माह से निजीकरण न कर पाने के कारण हताश प्रबंधन बिजली कर्मियों का लगातार उत्पीड़न कर रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न का उद्देश्य बिजली कर्मियों का मनोबल तोड़ना है किंतु बिजली कर्मी किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न की कार्यवाहियां मुख्यतया निम्नवत हैं।
फेशियल अटेंडेंस के नाम पर लगभग लगभग 10 हजार बिजली कर्मचारियों का लगातार चौथे माह भी वेतन नहीं दिया गया है। कार्य करने के बाद भी फेशियल अटेंडेंस जैसे विवादास्पद तकनीकी बिंदु को लेकर वेतन रोकना घोर निंदनीय है। सितंबर अक्टूबर का महीना हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों का महीना है। ऐसे में वेतन को रोक रखना उत्पीड़न की पराकाष्ठा है।
संघर्ष समिति की मांग है कि निजीकरण के नाम पर 55 साल की उम्र और डाउन साइजिंग के नाम पर हटाये गये सभी संविदा कर्मी बहाल किये जाय।
उत्पीड़न की दृष्टि से बिजली कर्मियों के किये गये सभी ट्रांसफर निरस्त किये जाय।
उत्पीड़न के नाम पर स्टेट विजिलेंस की जांच कराकर शीर्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध की गई फर्जी एफ आई आर वापस ली जाए।
रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से धमकी देकर जोर जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही तत्काल बन्द की जाय।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में मुख्यतया बड़ी विरोध सभा और प्रदर्शन किया गया।

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