वह समाजवादी पार्टी की सरकार ही थी जब आज़म खान ने तीन घंटे एक S.S.P. को अपने घर के बाहर खड़ा रहने का आदेश दे दिया था। जब आज़म खान ने जिलाधिकारी से जूते साफ करवाने की बात कही थी। जब मुख्तार अंसारी ने कोतवाली में ताला डलवा दिया था। जब अतीक अहमद ने बीस पुलिस वालों को अपने घर में कैद कर लिया था। जब डर की वजह से इनके मुकदमों को सुनने से मजिस्ट्रेट भी मना कर दिया करते थे और गवाह अदालत आने से मना कर देते थे ।
फिर वक्त बदला–एक ईमानदार संन्यासी नेता बनकर प्रदेश की गद्दी पर बैठा—देखते-देखते सब कुछ बदल गया, असहाय सी लगने वाली पुलिस इनको घसीट-घसीट कर थानों में लाने लगी। इनके घर में घुसकर ढिंढोरा पीटने लगी, नीलामियां होने लगी, धड़ाधड़ बुलडोजर चलने लगे, बड़े से बड़े माफिया और डांन सरेंडर करने लगे !
मैं केवल आपको इतना कहना चाह रहा हूं कि–जब सत्ता पर बैठा व्यक्ति ईमानदार और चरित्रवान होता है तो सबकी खुशहाली होती है, समाज का उत्थान होता है!
आप समझदार हैं, सत्ता किनके हाथों में सौंपनी है, यह आपको सोचना है ।
अधिकांश विरोधी पार्टियों के सु्प्रीमो के परिवार देखते देखते करोड़ों अरबों के मालिक बन गए ।
पर ताज़्जुब यह कि मोदी जी और योगी जी देश बेच कर भी फ़कीर के फ़कीर ही हैं.?





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