

अधर्म व पाप बढ़ने पर भगवान खुद अवतार लेते हैं—- श्रीमद् भागवत कथा
राठ(हमीरपुर)। नगर के पड़ाव चौराहा के समीप स्थित माँ शारदा काम्प्लेक्स राठ मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिन वृन्दावन से पधारे पं0 विवेक महाराज ने कथा करते हुए कहा कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ गया, तो देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लेने का वचन दिया। मथुरा की जेल में, आधी रात को, भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में, भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। जन्म के तुरंत बाद, माया के प्रभाव से वसुदेव जी उन्हें गोकुल में नंद और यशोदा के यहाँ ले गए और उनके बदले में उनकी नवजात बेटी को लेकर जेल लौट आए।
उन्होंने कहा कि कंस के अत्याचारों और अधर्म को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया।भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर, रोहिणी नक्षत्र में, रात के १२ बजे मथुरा के कारागार में हुआ कृष्ण के जन्म लेते ही देवकी और वसुदेव के बंधन टूट गए और जेल के ताले खुल गए।वसुदेव जी ने भगवान कृष्ण को एक टोकरी में रखा और यमुना नदी के पार गोकुल में नंद और यशोदा के घर छोड़ आए, जहाँ उनका जन्म हुआ था। वे वहाँ की नवजात कन्या को मथुरा वापस ले आए।कंस को जब पता चला कि देवकी का आठवाँ शिशु एक कन्या है, तो उसने उसे पत्थर पर पटकने की कोशिश की लेकिन वह कन्या हाथ से छूटकर विंध्याचल पर्वत पर विंध्यवासिनी देवी के रूप में चली गई और उसने कंस को चेतावनी दी कि उसका काल प्रकट हो चुका है।कथा मे प्रमुख रूप से बीके अग्रवाल (बल्लन सेठ), उ प्र उद्योग व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष केजी अग्रवाल, मण्डल के ही प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, शंकरलाल अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, मीरा अग्रवाल, ममता रवि गुप्ता, काशीप्रसाद गुप्ता, डॉ प्रदीप अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, कथा पारिछत सचिन अग्रवाल व उनकी पत्नी प्रियंका अग्रवाल, प्रिन्सी, सिब्बूअग्रवाल, हैदरावाद से सोनिया, मुंबई सोनम अग्रवाल, अभिराज एकांश उपस्थित रहे।
नोट—— कथा सुनते श्रोताओं का फोटो




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